देवा सिंगरौल
नमस्कार, मैं देवा सिंगरौल — पूरा नाम सुखदेव प्रसाद सिंगरौल पिता स्वर्गीय श्री चमरू राम सिंगरौल और लोग मुझे देवा के नाम से जानते हैं ग्राम चितावर का एक साधारण किसान परिवार का बेटा, जो आज इस गांव की सेवा में 10 साल (2 पंचवर्षी) सरपंच रहने के बाद अभी भी तीसरे कार्यकाल में भी सरपंच प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हूं। मेरी धर्मपत्नी श्रीमती इंद्राणी सिंगरौल जो वर्तमान में इस ग्राम की सरपंच के रूप में कार्यरत हैं, मेरी माता श्री श्रीमति धनमती सिंगरौल (गृहणी) मेरे बड़े भैया श्री सुखनंदन सिंगरौल (पंचायत सचिव) एवं मेरी भाभी श्रीमती पुनीता सिंगरौल गृहणी एवं (स्वास्थ्य मितानिन)।
जन्म एवं शिक्षा
मेरा जन्म 7 मई 1989 को छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत चितावर में हुआ। मैंने अपनी प्राथमिक की शिक्षा गृह ग्राम में ही प्राप्त किया तथा पूर्व माध्यमिक की शिक्षा गांव से 3 किलोमीटर दूर गिरधौना से प्राप्त किया। उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक की शिक्षा तखतपुर से प्राप्त की।
आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए मैंने बी.ए. और समाजशास्त्र विषय में एम.ए. की डिग्री जिला मुख्यालय बिलासपुर से हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ हमेशा से कृषि कार्य और जनसेवा ही मेरी मुख्य जीवनशैली रहे हैं।
राजनीति एवं जनसेवा
प्रथम बार चुनाव -04 फरवरी 2015 को ग्राम पंचायत चितावर के सरपंच प्रत्याशी के रूप में लड़ा ! राजनीति में आने की कभी कोई पहले से योजना नहीं थी — मेरे घर वालो का या मेरे पिता जी का किसी का भी विचार नहीं था राजनीती में जाने का हमेशा से मना किया गया मुझे लेकिन कुछः परिस्थितियाँ आ जाती है ज़िन्दगी में जिसके वजह से हमें उस रास्ते पर भी चलना पड़ जाता है जिसमे हमें मना किया जाता है इसी तरह मैं भी आ गया राजनीती में पहली बार चुनाव लड़ने।
4 फरवरी 2015 — यह तारीख मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। जब चुनाव परिणाम आया, तो गांव के 80% वोट मेरे पक्ष में पड़े। उसी दिन से मैं अपने समस्त ग्रामवासियों का ऋणी हो गया — यह जिम्मेदारी और भरोसा आज तक मुझे हर दिन आगे बढ़ने की ताकत देता है।
द्वितीय चुनाव एवं अटूट विश्वास (2020):
2015 में मिले 80% जनसमर्थन के बाद मेरे ऊपर गांव के विकास की जो बड़ी जिम्मेदारी आई थी, मैंने उसे पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया।
मेरी निष्ठा और मेहनत का परिणाम यह रहा कि वर्ष 2020 के पंचायत चुनाव में ग्राम चितावर की जनता ने किसी अन्य प्रत्याशी को मैदान में खड़े होने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होने दी। गांव वालों ने एकमत होकर मुझे निर्विरोध सरपंच चुना। यह निर्विरोध निर्वाचन केवल मेरी जीत नहीं थी, बल्कि चितावर के प्रत्येक नागरिक के भरोसे और एकता की जीत थी।
महिला सशक्तिकरण एवं निरंतर जनसेवा (2025):
वर्ष 2025 में जब त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान सरपंच पद के लिए महिला आरक्षण लागू हुआ, तो हमारे सामने एक नई परिस्थिति आई। मेरी धर्मपत्नी, जो कभी घर की चौखट से बाहर नहीं निकली थीं और राजनीति से पूरी तरह दूर थीं, उन्हें गांव के बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चुनाव मैदान में उतरने का आग्रह किया।
गांव के लोगों का प्रेम और विश्वास इतना अटूट था कि उन्होंने मेरी पत्नी को भी वही मातृवत आशीर्वाद और समर्थन दिया, जो मुझे 2015 से मिलता आ रहा था। चितावर की जनता ने यह साबित कर दिया कि वे व्यक्ति को नहीं, बल्कि काम, ईमानदारी और सेवा भाव को अपना वोट देते हैं।
आगे का सपना — भविष्य की योजनाएं
गांव के सर्वांगीण विकास के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। शासन से पर्याप्त बजट व राशि स्वीकृत होने पर निम्नलिखित कार्य मेरी प्राथमिकता में रहेंगे:
चितावर से अमोरा पहुंच मार्ग (2 किमी):
यह मार्ग चितावर को मुंगेली जिले से जोड़ेगा। अमोरा में हायर सेकंडरी स्कूल और शासकीय कन्या महाविद्यालय (Girls College) होने के कारण, यह 2 किमी की सड़क हमारे गांव के बच्चों, विशेषकर बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
चितावर से पिपरहट्टा पहुंच मार्ग (3 किमी):
वर्तमान में तहसील कार्यालय, थाना और विधानसभा क्षेत्र जाने के लिए ग्रामीणों को 20 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है। इस मार्ग के बनने से यह दूरी घटकर मात्र 12 किलोमीटर रह जाएगी।
सुंदर, स्वच्छ व आदर्श गांव:
पूरे गांव को एक समान रंग-रूप में संवारना, स्वच्छता की व्यवस्था को आधुनिक बनाना और राजनीति के माध्यम से जन-जन की भलाई करना ही मेरा दीर्घकालिक सपना है।
